Monday, March 24, 2008

7.09 बानर के करतूत

[ कहताहर - रूपनारायण, मो॰-पो॰ - बेलखरा, जिला - जहानाबाद]

अच्छा एगो बनर हले । एक दिन ऊ बइर खाइत हले कि ओकर नके में एगो बइर अँटक गेल । से ऊ नउवा के पास निकाले ला गेल । नउवा कहलक कि कहीं नकिया कट जतउ तो कहाँ से अतउ ? बनरा कहलक कि तोर-मोर बलइए से । नउवा ओकर नाक से बइर निकाले लगल । बइर तो निकल गेल बाकि ओकर नाके कट गेल । तब बनरा कहलक कि नाक दे इया नरहनी दे । नउवा नरहनी दे देलक आउ बनरा ले के चल देलक ।

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